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हमने दूर की आकाशगंगाएँ देखना सीखा।

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पर कभी पास के मनुष्य को देखना छोड़ देते हैं।

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हमारे पास ज्ञान, ऊर्जा, हज़ारों समाधान हैं।

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फिर नदी उथली क्यों होती है, भूमि शक्ति क्यों खोती है,

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और साझा काम अलग-अलग प्रयासों में क्यों बिखरता है?

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शायद कमी शक्ति की नहीं।

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कमी संबंध की है।

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जो «मैं कर सकता हूँ» को «हम करेंगे» बनाता है।

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विकास मशीन में शुरू नहीं होता।

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वह तब शुरू होता है जब मनुष्य ज़िम्मेदारी लेता है।

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ऐसी योजना सोचें, जिसे हर ओर से देख सकें।

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यहाँ क्षेत्र जल से जुड़ा है।

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जल जीवन से। ज्ञान कर्म से।

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संसाधन दायित्व से।

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हर निर्णय के परिणाम हैं,

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जो सुंदर शब्दों के पीछे नहीं छिप सकते।

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इस दृष्टि से SPECZASHCHITA की परिकल्पना जन्मती है।

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लोगों को स्पष्ट कार्य के लिए जोड़ना।

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जहाँ रहते हैं, उस स्थान को सुनना।

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कुशल लोगों को खोजना।

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ज़रूरतों पर सहमति बनाना।

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पहले से समझना कि परिणाम कैसे जाँचा जाएगा।

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सब एक साथ बदलने की प्रतीक्षा न करें।

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एक तट से शुरू करें।

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एक स्रोत से। अंत तक पहुँचाए एक काम से।

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उपकरण को काम मिले, अनुभव को उपयोग,

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और नए विचार को दल।

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सहायता सटीक कर्म बने, वादा पूरा किया दायित्व।

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इस राह में भूलें होंगी। कठिन प्रश्न होंगे।

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काम पूरा हो सकता है, पर प्रकृति अभी सँवरी न हो।

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इसलिए सुंदर दृश्य दिखाना काफ़ी नहीं।

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लौटना होगा। मापना होगा।

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तुलना करें। जो न हो सका, उसे मानें।

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और मिलकर सुधारें।

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ऐसे विश्वास जन्मता है।

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बड़ी घोषणा से नहीं, प्रमाणित परिणाम से।

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ऐसे अलग कर्म जीवंत प्रणाली बनाते हैं।

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जहाँ विशाल तंत्र में मनुष्य खो न जाए।

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जहाँ ज्ञान जाँच के लिए खुला हो।

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जहाँ भविष्य आज के हमारे काम से बढ़े।

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अगला क़दम पहले से लिखा नहीं। हम चुनते हैं।

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एक बार नहीं — हर दिन।

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भविष्य आकार लेता है जब हम साथ काम करते हैं।

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मैट्रिक्स। विकास।

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SFERA — सीमाओं से परे संसार।

