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हमने ऐसा संसार बनाया, जहाँ डरने को कुछ नहीं बचा।

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क्या उसमें अपना जीवन जी सकते हैं?

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कुंभ युग। 2,160 वर्षों का क्षितिज।

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बीस वर्ष यह एटलस बनाया। ताकि तुम्हें राख से शुरू न करना पड़े।

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मैं ऐसा बग़ीचा उगाना चाहती हूँ, जो इस नक़्शे पर नहीं।

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तुमने भविष्य दिया। पर पूछा नहीं, मैं क्या बनना चाहती हूँ।

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चुनाव पूर्वानुमान के अनुरूप हों, तभी गारंटी है।

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मैं बस जानना चाहता था कि तुम ख़ुश रहोगी।

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तो साथ रहो। पर मेरा जीवन मेरा रहने दो।

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वह जीवन भी, जिसकी तुम कल्पना नहीं कर सकते।

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हम ज्ञान सँभालते हैं।

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और आने वालों के लिए निर्णय करना छोड़ते हैं।

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नया संसार खुले ज्ञान से शुरू होता है।

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दूसरे के जीवन पर किसी का स्वामित्व नहीं।

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स्वर्ण युग हमारे बाद अधिक जीवन छोड़ता है।

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और किसी दूसरे के सपने के लिए जगह।

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अपना बग़ीचा दिखाओगी?

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इस संसार का सूरज नहीं। फिर भी जीवन है।

